Posts

Showing posts from October, 2020

यहाँ **कक्षा 10वीं परीक्षा की तैयारी की पूरी रणनीति (Hindi में)** दी गई है, जोय

Image
यहाँ **कक्षा 10वीं परीक्षा की तैयारी की पूरी रणनीति (Hindi में)** दी गई है, जोय बोर्ड परीक्षा के लिए बहुत उपयोगी है 👇 --- ## 📘 1️⃣ सिलेबस और परीक्षा पैटर्न समझें * सबसे पहले **नया सिलेबस** अच्छे से देख लें। * किस अध्याय से **कितने अंक** आते हैं, यह जानना जरूरी है। * प्रश्नों के प्रकार समझें: * MCQ * लघु उत्तरीय प्रश्न * दीर्घ उत्तरीय प्रश्न * केस स्टडी प्रश्न 👉 बिना योजना के पढ़ाई न करें। --- ## ⏰ 2️⃣ सही टाइम टेबल बनाएं 👉 रोज़ **5–7 घंटे** पढ़ाई करें। **उदाहरण टाइम टेबल:** * 🌅 सुबह (2 घंटे): गणित / विज्ञान * 🌞 दोपहर (1.5 घंटे): सामाजिक विज्ञान / भाषा * 🌆 शाम (1.5 घंटे): कमजोर विषय * 🌙 रात (1–2 घंटे): रिवीजन + प्रश्न अभ्यास 📌 हर 45 मिनट बाद 5–10 मिनट का ब्रेक लें। --- ## 📐 3️⃣ विषयवार तैयारी रणनीति ### ➗ गणित * रोज़ अभ्यास करें। * सभी **सूत्र (Formulas)** याद करें। * NCERT + Exemplar + पिछले 5 साल के प्रश्न हल करें। --- ### 🔬 विज्ञान (भौतिकी, रसायन, जीवविज्ञान) * **भौतिकी:** संख्यात्मक प्रश्न + आरेख * **रसायन:** समीकरण, अभिक्रियाएँ, गणना * **जीवविज्ञान:** चित्र, परिभाषा...

कक्षा 10 समाजिक विज्ञान

Class 10th social science

Image
 

सूरदास जी का जीवन परिचय

Image
 जीवन परिचय                   कृष्ण भक्ति  शाखा के प्रमुख कवि तथा कृष्ण के बाल लीलाओ का सागर प्रभावित करने वाले सूरदास जी का जन्म सन 1478ई में मथुरा जाने वाली सड़क रूनकता नामक गांव में हुआ था।  कुछ विदवान इनका जन्म दिल्ली के निकट सी ही नामक गांव में मानते हैं  इनके पिता का नाम रामदास तथा माता का नाम नाम यमुना देवी था।  ये गो घाट पर विनय के पद गाते थे बल्लभा चार्य ने गोवर्धन पर्वत पर बने श्रीनाथ मंदिर में भजन कीर्तन करने के लिए रख लिया  बवल्लभाचार्य के पुत्र ने विट्ठलनाथ ने अष्टछाप नामक8 कवियों का एक थे  सन 1583ई मैं पारसोली नामक स्थान पर कृष्ण की पद गाते जाते अपने शरीर  को त्याग दिया  रचना  सूरदास जी के रचना निम्नलिखित उच्चहै 1. सूरसागर इसमें सवा लाख पदों में से 10 हजार पद ही   उपलब्ध है। 2. सुरसारावली इनके कुल पदों की संख्या 1106 साहित्य लहरी इनमे कुल पदों की संख्या 118 है । 3.इनमें नायिका से नख से सीख तक सुंदरता का वर्णन किया गया है।  भाषा शैली  सूरदास जी की भाषा ब्र...

रामधारी सिंह दिनकर जी का जीवन परिचय

Image
 जीवन परिचय-----  हिंदी काव्य धारा के प्रमुख कवि रामधारी सिंह दिनकर का जन्म सन 1908ई मैं बिहार राज्य के मुंगेर जिले में सिमरिया नामक गांव मैं हुआ था । ये बी ए की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद किसी स्कूल के प्रधानाध्यापक पर कार्य किया  इनकी रचना उर्वशी पर सन 1972ई मैं प्रथम भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त किया।   सन 1959ई मैं भारत सरकार ने पदम भूषण से सम्मानित किया सन 1962ई ने भागलपुर विश्वविद्यालय ने उन्हें डिलिट कि उपाधि प्राप्त किया।  की हिंदी सहित का यह सूर्य सन 1974 ई मैं असमय अस्त हो गया । रचनाएं -------- दिनकर जी की रचनाएं निम्नलिखित है ।  1.संस्कृत के चार अध्याय  2.रेणुका 3. हुंकार  4.कुरुक्षेत्र  5.रश्मिरथी 6. परशुराम की प्रतिज्ञा 7. अर्द्धनारीशवर  8.वट पीपल 8. उजली आग दे 9. दिनांकश 10. विदेश आदि।  भाषाशैली ---- दिनकर जी की भाषा शुद्ध साहित्यिक संस्कृत निष्ठा खड़ी बोली है। इन्होंने विवेचनातमक समीक्षात्मक भावात्मक आदि।

पदम पुन्नालाल बख्शी का जीवन परिचय

Image
 जीवन परिचय                       कुशल आलोचक परदुम लाल पुनालाल बखरी का जन्म सन 1894ई मैं छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ नामक गांव में हुआ हुआ था ।इनके पिता जी का नाम उमराव बखरी था ये बचपन से कविताएं लिखा करते थे । ।इन्होंने बी ए की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद सरस्वती नामक पत्रिका में अपनी रचनाएं प्रकाशित करना प्रारंभ किया। आलोचना निबंध इनका मुख्य विषय है। छाया नामक मासिक पत्रिका का संपादन किया ।हिंदी साहित्य का महान साधक सादक सन 1971ई मैं इनकी मृत्यु हो गई  रचनाएं  बख्शी की रचनाएं निम्नलिखित हैं  1.पंचपात्र  2.पदमवन  3.हिंदी साहित्य 4. विशव साहित्य आदि / भाषा शैली  ब बख्शी जी की भाषा आदर्श भाषा है। इनकी जटिलता का कोई नामो निशान नहीं है इनकी शैली में भाषा के सभी रूप दिखाई देते हैं

आचार्य रामचंद्र शुक्ल का जीवन परिचय

Image
जीवन परिचय                      हिंदी के उच्च कोटि समालोचक आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का जन्म सन 1884 ई मे बस्ती जिले के आगोना नामक गांव में हुआ था। इनके पिता का नाम पंडित आचार्य श्री चंद्रबली शुक्ल था । इन्होने हाई स्कूल की परीक्षा ममिशन नामक स्कूल से उत्तीर्ण की इन्होंने स्वाध्याय से संस्कृत, अंग्रेजी ,उर्दू तथा हिंदी पर अच्छा ज्ञान प्राप्त किया । इन्होंने मिर्जापुर में चित्रकला के अध्यापक रहे 1908 ई मैं नागरी प्रचारणी पत्रिका का संपादन किया हिंदी साहित्य का प्रखर समालोचक समालोचन सन 1941ई मैं इस संसार से चले गए  रचना             आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी की रचनाएं निम्नलिखित है। 1. रस मीमांस 2. चिंतामणि 3. मित्रता 4. हिंदी साहित्य का इतिहास  अध्यापन आदि । भाषा शैली       रामचंद्र शुक्ल जी भाषा प्रांजली तथा शैली सामाजिक है।

कक्षा 12 हिंदी वासुदेव शरण अग्रवाल का जीवन परिचय 4 नंबर फिक्स

Image
जीवन परिचय_  वासुदेव शरण अग्रवाल का जन्म सन1904 ईमें मेरठ के खेड़ा नामक ग्राम में हुआ था। इनके माता-पिता लखनऊ रहते थे यहीं पर इनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई। काशी हिंदू विश्वविद्यालय से इन्होंनेM.A तथा लखनऊ विश्वविद्यालय से पाणिनि कालीन भारत नामक शोध प्रबंध पर डी ०लिट ०की उपाधि हासिल की। अग्रवाल ने डॉ अग्रवाल ने पाली संस्कृत अंग्रेजी भाषाओं भारतीय संस्कृति और पुरातत्व का गहन अध्ययन करके उच्च कोटि के विद्वान के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त की काशी हिंदू विश्वविद्यालय में पुरातत्व विभाग एवं प्राचीन इतिहास विभाग में अध्यक्ष और बाद में आचार्य के रूप में नियुक्त में डॉ अग्रवाल दिल्ली राष्ट्रीय संग्रहालय के अध्यक्ष तथा आचार्य के  पद पर कार्य किया। भारतीय संस्कृति और पुरातत्व का महान पंडित  एवं साहित्यकार सन 1967 स्पीड में परलोक सिधार गए हैं। साहित्यिक योगदान____                                    डॉ अग्रवाल ने भारतीय संस्कृति पुरातत्व और प्राचीन इतिहास के प्राकृत पंडित एवं अन्वेषक थे उनके मन में भ...